सच्चा झुठा इक सपना है.
जो है जैसा है अपना है.
तुम पर मरना, तुम बीन मरना.
मेरा जीना इक अफवा है.
इक नजर बस उस ने देखा.
मेरी आंखों में सझदा है.
भीतर चाहे गम की बारीश,
बाहर तो हम को हसना है.
चाहत है तो कहेदो खुल कर.
सच्चाई से क्या डरना है.
मरना-जीना क्या है चेतन.
सांसों का रूकना चलना है.
Saturday, May 9, 2009
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