बादल में ही बचपन देखा.
गोपी का वृंदावन देखा.
सच्ची- मीठी- प्यारी बातें.
ममता का वह दामन देखा.
अश्रु मेरे, छलके जो थोडे,
ऊन आंखों में सावन देखा.
सपने सच्चे होते देख
मेरे घर जब मांगन देखा.
जब से चेतन भीतर देखा,
हर इक दिल को पावन देखा.
आपके किंमती अभिप्राय आवकार्य हैं!
चेतन फ्रेमवाला
Saturday, May 9, 2009
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