अब ना चां और सीतारों को परेशान करो
दीए जो दिल में बूझे हैं ,रोशनान करो.
आज आंखों मे लहु, सीने में खंजर क्यूं है,
मसला यह भी है मुश्कील, ईसे आसान करो.
जो भदके शोले तो बारीसें भी होंगी जरुर,
है गर खुदा,ऐतबार उस पे तमाम करो.
आंखों के शोले, दिल कि नफरत सब धुंवां हो जाएगी,
बस हेवां जो है दिलमें ,उसे ईंसान करो.
चेतन अब ना हिंदु, ईसाई ना मुसलमां रहिए.
एक हो कर सब,बुलंद ये हिन्दोस्तां करो
Saturday, May 9, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment