Saturday, May 9, 2009

एक Gazal

हां उस ने तो सच बोला है.
भीतर तो पोलंपोला है.

मेरा पल्ला ऊपर ही था.
खुद को मैने जब तोला है.

असली नकली कैसे जानें
चौलों के ऊपर चौला है.

जग में अपना किस को माने
अपना तो केवल मौला है.

रब को मैने भीतर पाया.
मेरे दिल को जब खोला है.

किस्तों में ही सांसें पाई.
किस्तों से जीवन जोडा है.

सच को वह ,बस सच जाने
चेतन भी कितना भोला है.

आपके किंमती अभिप्राय आवकार्य हैं!
चेतन फ्रेमवाला

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