गम -खुशी में, साथ दे जो.
दोस्त ऐसा मुझको दे दो.
और क्या मैं रब से मांगुं.
बाकी सब कुछ चाहे ले लो
दिल के सब झख्मों को अब सी लो यारो.
खुशी हो या गम सब कुछ पी लो यारो.
सब को सब कुछ ना देना, रब की मजबूरी.
जीवन जैसा भी है जी लो यारो
तन्हा तन्हा बीता जीवन
बुंद्-बुंद बस रीता जीवन.
बिखरा-बिखरा, ताना बाना.
कितने पैबंध सीता जीवन.
चाहे अल्हा ईशु बोलो , चाहे ईश्वर बोलो तुम
मैं रब से बस ईतना मांगुं, दिल दरवजा खोलो तुम्
Saturday, May 9, 2009
sachchaai
सच्चा झुठा इक सपना है.
जो है जैसा है अपना है.
तुम पर मरना, तुम बीन मरना.
मेरा जीना इक अफवा है.
इक नजर बस उस ने देखा.
मेरी आंखों में सझदा है.
भीतर चाहे गम की बारीश,
बाहर तो हम को हसना है.
चाहत है तो कहेदो खुल कर.
सच्चाई से क्या डरना है.
मरना-जीना क्या है चेतन.
सांसों का रूकना चलना है.
जो है जैसा है अपना है.
तुम पर मरना, तुम बीन मरना.
मेरा जीना इक अफवा है.
इक नजर बस उस ने देखा.
मेरी आंखों में सझदा है.
भीतर चाहे गम की बारीश,
बाहर तो हम को हसना है.
चाहत है तो कहेदो खुल कर.
सच्चाई से क्या डरना है.
मरना-जीना क्या है चेतन.
सांसों का रूकना चलना है.
एक Gazal
हां उस ने तो सच बोला है.
भीतर तो पोलंपोला है.
मेरा पल्ला ऊपर ही था.
खुद को मैने जब तोला है.
असली नकली कैसे जानें
चौलों के ऊपर चौला है.
जग में अपना किस को माने
अपना तो केवल मौला है.
रब को मैने भीतर पाया.
मेरे दिल को जब खोला है.
किस्तों में ही सांसें पाई.
किस्तों से जीवन जोडा है.
सच को वह ,बस सच जाने
चेतन भी कितना भोला है.
आपके किंमती अभिप्राय आवकार्य हैं!
चेतन फ्रेमवाला
भीतर तो पोलंपोला है.
मेरा पल्ला ऊपर ही था.
खुद को मैने जब तोला है.
असली नकली कैसे जानें
चौलों के ऊपर चौला है.
जग में अपना किस को माने
अपना तो केवल मौला है.
रब को मैने भीतर पाया.
मेरे दिल को जब खोला है.
किस्तों में ही सांसें पाई.
किस्तों से जीवन जोडा है.
सच को वह ,बस सच जाने
चेतन भी कितना भोला है.
आपके किंमती अभिप्राय आवकार्य हैं!
चेतन फ्रेमवाला
Barish
अब के बर्सो तो युं बरसो, हर चातक की प्यास बुझे.
चहेरेमें खिले गुल,गुलशन में, कोकिल की आवाझ गुंझे.
तेरे गम में, मैं हुं शामिल,मेरे सुख में आना तु भी.
अश्रु छलके तेरी आंखों से, मेरे दिल से आह ऊठे.
हर कुचे में, बेबस अबला, क्युं जलती है सोच जरा.
लालच के ईन पाषाणों में, अब तो थोडा, प्यार ऊगे.
चारा खाता, रबडी खाता, युरीया जिसने पचाया है.
ऐसा नेता तेरे दुःख की, क्युं कोई फरियाद सूने.
चेतन चाहे तुम चिल्लाओ,जैसे भी हो वह खुशी पाता.
चाहे हरसु अग्नी फैले, चाहे तेरा घर ही तूटे.
आपके किंमती अभिप्राय आवकार्य हैं!
चेतन फ्रेमवाला
चहेरेमें खिले गुल,गुलशन में, कोकिल की आवाझ गुंझे.
तेरे गम में, मैं हुं शामिल,मेरे सुख में आना तु भी.
अश्रु छलके तेरी आंखों से, मेरे दिल से आह ऊठे.
हर कुचे में, बेबस अबला, क्युं जलती है सोच जरा.
लालच के ईन पाषाणों में, अब तो थोडा, प्यार ऊगे.
चारा खाता, रबडी खाता, युरीया जिसने पचाया है.
ऐसा नेता तेरे दुःख की, क्युं कोई फरियाद सूने.
चेतन चाहे तुम चिल्लाओ,जैसे भी हो वह खुशी पाता.
चाहे हरसु अग्नी फैले, चाहे तेरा घर ही तूटे.
आपके किंमती अभिप्राय आवकार्य हैं!
चेतन फ्रेमवाला
baabari
अब ना चां और सीतारों को परेशान करो
दीए जो दिल में बूझे हैं ,रोशनान करो.
आज आंखों मे लहु, सीने में खंजर क्यूं है,
मसला यह भी है मुश्कील, ईसे आसान करो.
जो भदके शोले तो बारीसें भी होंगी जरुर,
है गर खुदा,ऐतबार उस पे तमाम करो.
आंखों के शोले, दिल कि नफरत सब धुंवां हो जाएगी,
बस हेवां जो है दिलमें ,उसे ईंसान करो.
चेतन अब ना हिंदु, ईसाई ना मुसलमां रहिए.
एक हो कर सब,बुलंद ये हिन्दोस्तां करो
दीए जो दिल में बूझे हैं ,रोशनान करो.
आज आंखों मे लहु, सीने में खंजर क्यूं है,
मसला यह भी है मुश्कील, ईसे आसान करो.
जो भदके शोले तो बारीसें भी होंगी जरुर,
है गर खुदा,ऐतबार उस पे तमाम करो.
आंखों के शोले, दिल कि नफरत सब धुंवां हो जाएगी,
बस हेवां जो है दिलमें ,उसे ईंसान करो.
चेतन अब ना हिंदु, ईसाई ना मुसलमां रहिए.
एक हो कर सब,बुलंद ये हिन्दोस्तां करो
bachapan
बादल में ही बचपन देखा.
गोपी का वृंदावन देखा.
सच्ची- मीठी- प्यारी बातें.
ममता का वह दामन देखा.
अश्रु मेरे, छलके जो थोडे,
ऊन आंखों में सावन देखा.
सपने सच्चे होते देख
मेरे घर जब मांगन देखा.
जब से चेतन भीतर देखा,
हर इक दिल को पावन देखा.
आपके किंमती अभिप्राय आवकार्य हैं!
चेतन फ्रेमवाला
गोपी का वृंदावन देखा.
सच्ची- मीठी- प्यारी बातें.
ममता का वह दामन देखा.
अश्रु मेरे, छलके जो थोडे,
ऊन आंखों में सावन देखा.
सपने सच्चे होते देख
मेरे घर जब मांगन देखा.
जब से चेतन भीतर देखा,
हर इक दिल को पावन देखा.
आपके किंमती अभिप्राय आवकार्य हैं!
चेतन फ्रेमवाला
Tanhaai
मैं तन्हा हुं , तन्हा तु भी
लूटा हुं मै, लूटा तु भी.
यह आग क्युं है हर कुचे
जलता मैं हुं, जलता तु भी.
यह रात अब कैसे कटे?
जागा मई हुं, जागा तु भी.
आंखें मेरी रोने ना दें.
भीगा मईं हुं, भीगा तु भी.
अब हाथों से पत्थर ले लो.
शीशा मैं हुं, शीशा तु भी.
चेतन अब क्या, तेरा-मेरा.
हारा मैं हुं हारा तु भी.
आपके किंमती अभिप्राय आवकार्य हैं!
चेतन फ्रेमवाला
लूटा हुं मै, लूटा तु भी.
यह आग क्युं है हर कुचे
जलता मैं हुं, जलता तु भी.
यह रात अब कैसे कटे?
जागा मई हुं, जागा तु भी.
आंखें मेरी रोने ना दें.
भीगा मईं हुं, भीगा तु भी.
अब हाथों से पत्थर ले लो.
शीशा मैं हुं, शीशा तु भी.
चेतन अब क्या, तेरा-मेरा.
हारा मैं हुं हारा तु भी.
आपके किंमती अभिप्राय आवकार्य हैं!
चेतन फ्रेमवाला
Thursday, March 12, 2009
दहेशत
आंखों के इन आंसुं ओं को पढना सीखो.
आंसुं जो देता है उनसे लडना सीखो.
दहेशत सीने में घेरे क्युं बैठें चेतन.
दहेशत पीछे छोडो, आगे बढना सीखो.
चेतन फ्रेमवाला
आंसुं जो देता है उनसे लडना सीखो.
दहेशत सीने में घेरे क्युं बैठें चेतन.
दहेशत पीछे छोडो, आगे बढना सीखो.
चेतन फ्रेमवाला
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